प्रत्यक्ष-परोक्ष कूटनीति -
बहुत प्राचीन काल से ही प्रवृत्ति रही है कि एक देश के शासक दूसरे देश को कमजोर करने के विभिन्न मार्ग अपनाते रहते हैं। आम तौर पर इस उद्देश्य के लिये कूटनीति का सहारा लिया जाता है। राजशाही के समय अलग तरह की कूटनीति का प्रयोग होता था। किन्तु लोकतन्त्र में सत्ता किसी व्यक्ति या समूह तक सीमित न होकर आम जन समूह पर आधारित होती है। इसलिये विदेशी कूटनीति भी राजनैतिक दलों के साथ-साथ जनता तक को कूटनीतिक प्रभावों में लाने की कोशिश करती है। यह कूटनीतिक कोशिश शत्रु राष्ट्र तक तो होती ही है, किन्तु मित्र राष्ट्रों तक भी इस नीति का उपयोग किया जाता है। दूसरे देशों के संवेदनशील सत्ताधीशों की जासूसी तो एक आम बात है ही, किन्तु कमजोर राष्ट्रों को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता देकर तथा अप्रत्यक्ष वैचारिक द्वंद्व पैदा करने की भी कोशिशें आमतौर पर दिखती हैं। भारत में भी दो सशक्त ध्रुव अपने-अपने वैचारिक तथा राजनैतिक हितों के लिये प्रत्यक्ष तथा परोक्ष कूटनीति का प्रयोग करते हैं।
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